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लाला गुस्से में है ।

Posted On: 18 Oct, 2013 Others,हास्य व्यंग में

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लाला को कौन नहीं जानता है । इतने मशहुर हैं कि खास से आम हो गए है । ख़बरों से उन्हें खीझ है पर बेखबर नहीं रहते । इन दिनों उन्हें प्याज और पेट्रोल बहुत रुला रहा है । सालाना बजट की मार तो झेलते ही हैं उसके बाद भी महंगाई के डंडे का डर हर वक्त लगा रहता है । इन सब के बीच सुबह से लेकर दिनभर की खीझ को शाम – शाम तक सोशल मीडिया के जरिये भड़ास निकल कर सो जाते हैं ।
लाला की एक और अनोखी बात है , तमाम व्यस्तता के बाद भी 47 माडल की विंटेज कार को नहीं भूलते और उसके लिए समय निकल लेते हैं । लाला को कार और उसके लिए प्यार दोनों विरासत में मिली है । उनके पिता ने बताया था की कार को गोरे चोरों ने चुरा लिया था । परिवार के लोगों को मिल कर चोरों से मुकाबला करना पड़ा । कार तो मिल गयी पर उन दुष्ट चोरों ने सोने सी कार के साथ बड़ा बुरा बर्ताव किया । खैर इस बात को लम्बा अरसा गुजर गया । अब तो पड़ोसियों की जरा सी खरोंच लगाने की साजिश पर उनका खून उबलने लगता और मरने मारने पर उतारू हो जाते ।
एक सुबह धुली चमकती कार ले कर लाला घर से निकल ही रहे थे कि मनोहर चचा ने आवाज दी
” कहाँ जा रहे लाला । ”
” जी आपनी फैक्ट्री तक ।” लाला ने अनमना सा उत्तर दिया ।
” मुझे भी बिठा लो लाला कुछ मिल आगे उतर जाऊंगा ” चचा ने अनुरोध किया ।
” कुछ मिल तो ठीक है पर जाना कहाँ है ? तो भी बैठ जाओ । ” कहते हुए लाला ने गाड़ी का दरवाजा खोल दिया ।
चचा और लाला गाड़ी बैठ गए, गाड़ी आपने मद्धिम रफ़्तार से चल पड़ी I लाला का मूड आज ठीक नहीं था ।
चचा भांप गए बैठे बिठाइए सफ़र काटने का मुद्दा मिल गया , और कारण पूछ डाला । लाला ने बताया कि नौकरी कि मंदी से तंग आकर छोटी फैक्ट्री डालने कि सोंची पर सरकारी अड़चनों में फंसी है ।
” पर चिंता कि रेखाएं तो आपके चहरे पर है , चचा । ” लाला ने सहानूभूति जताई ।
“ये तो बुढ़ापे कि झुर्रियां हैं , लोग इन्हें चिंता समझ लेते हैं ।” चचा ने दाढ़ी सहलाते हुए कहा
चचा कभी इस रस्ते कभी उस रस्ते लाला को बहुत भटका चुके थे । इस दायें बाएं के चक्कर में पेट्रोल ख़तम होने को था । लाला ने गाड़ी पेट्रोल पंप में लगा दी । चचा से कहा ” पेट्रोल बहुत महंगा तुम भी आपना योगदान दो ।” “मै कहाँ से दूं , मेरे पास पैसे नहीं हैं । पैसे क्या पेड़ पे उगते हैं ।” चचा का टका सा जवाब था । लाला को इस जवाब में ढीठपन दिखा । इसने उसके गुस्से को बढ़ा दिया । आग बबूला हो कर बोला ” चचा , एक तो मेरी गाड़ी पर सवार हो , महंगे पेट्रोल में भी पैसो कि मदद नहीं के , रामलीला मैदान , जंतर- मंतर ,कोल ब्लाक जाने कहाँ कहाँ बेवजह के चक्कर लगवा दिए । और तो और तुम और तुम्हारे दोस्तों के टुजी गप्प ने मेरे फ़ोन को भी नहीं छोड़ा । क्या इन्ही रास्तो पर मीलों ले जाओगे । लाला के उलाहनों की सूची लम्बी होती जा रही थी । पर चचा चुप्पी साधे गाड़ी में बैठे थे । लाला सचमुच इस बार गुस्से में है ।

निरेन
nirenchandra@ymail.com



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