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बिहार-गीत

Posted On: 23 Mar, 2013 Others,कविता में

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बिहार-गीत

शत नमन तुम्हें,
कल्याण करो,
हम बढे आगे अभिमान से I

गंगा सिंचित श्यामल धरती, .
कण कण बोधित्व से भरी प्रकृति,
है उज्जवल बुद्ध के ज्ञान सेI
भरे उडान उचें नभ में,
आर्यभट्ट के विज्ञान से I

शत नमन तुम्हें, कल्याण करो,
हम बढे आगे अभिमान से I

गुरु गोबिंद की पावन धरा पे,
मौर्य शौर्य भरा रग रग में,
रचे बसे हर प्राण से ,
मानवता की रित चलन में,
है सर्वधर्म के नाम से I

शत नमन तुम्हें, कल्याण करो ,
हम बढे आगे अभिमान से

कूकती है इसकी बानी,
मगही ,मैथिल, भोजपुरी
और अंगिका के गान से,
सर माथे पे इसकी धूलि,
गणतंत्र की पहली सोपान से I

शत नमन तुम्हें, कल्याण करो,
हम बढे आगे अभिमान से I

निरेन
nirenchandra@ymail.com

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